Sunday, July 21, 2019

ऐ ख़ुदा है कहाँ? सुन मेरी दास्ताँ Comments

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ऐ ख़ुदा है कहाँ? सुन मेरी दास्ताँ
तड़प रही ये ज़मीं, रोरहा आसमां
नफ़रतों की भीड़ से तीर शमशीर से
लहू में तरबतर हुआ दिल, ज़ेहन जिस्म जां
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NADIR HASNAIN
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