अलविदा Poem by Siddhant Oys

अलविदा

तुम्हारी
यादों के पुलिंदे
और एक ख़त
मेरी टाँण पर
रखे हैं,
उसी टाँण पर
दाहिनी तरफ
तुम्हारे
कुछ मुट्ठी भर
गीत पड़े हैं,
आज जब
पानी बरसेगा
तो तुम्हारे
ख़त की नाव में
मैं वो पुलिंदे
तुम्हें भेज दूंगा।
सुनो.......
देर रात
अपनी खिड़की से
जब मैं
तुम्हारे गीत
गुनगुनाऊँ............
अपनी मुडेर पर आकर
तुम वो गीत भी
ले लेना।।

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