तुम्हारे लिए Poem by Siddhant Oys

तुम्हारे लिए

अभी कल ही की बात है
जब मैंने बोये थे
कुछ आखिरी शब्द
कागजों पर
सिलसिलेवार क्रम में,
और अब मेरे पास
तुम्हें देने को
कवितायेँ नहीं।
वैसे भी,
तुम पर कुछ लिखना
कितना कठिन है न,
जब कि तुम
इतने भी सुन्दर नहीं
कि बन न सके
तुम पर एक कविता।
और अब
सोचता हूँ कि
तुम पर
कुछ न कुछ
गढ़ने को
चुनने हैं अभी
कितने और शब्द,
इसी उहापोह में
कविता जैसी ही ये कविता
केवल तुम्हारे लिए।।

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