नशाः जिँदगी का कोढ़ Poem by shakti singh

नशाः जिँदगी का कोढ़



यह जिँदगी का कोढ़ है।
यह जिँदगी का कोढ़ है।।
करता सदा करता सदा ।
यह मृत्यु से गठजोड़ है।।

देता बुलावा मृत्यु को।
यह कर रहा बर्बाद है।।
जो ना करे इस नशे को।
वह सर्वथा आबाद है।।

Friday, May 2, 2014
Topic(s) of this poem: art
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