Saturday, August 8, 2015

घर की रौनक़ शान है बेटी ………ममता की पहचान है बेटी Comments

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(बेटी)
घर की रौनक़ शान है बेटी ………ममता की पहचान है बेटी
उसी कोख से बेटा जन्मा……………मां की ही संतान है बेटी
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NADIR HASNAIN
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Rajnish Manga 02 July 2017

परिवार व समाज में बेटी या उस हवाले से नारी के सम्मान को ले कर यह एक खुबसूरत कविता है. सामयिक महत्त्व की रचना. दहशत से हैरान है बेटी ………… घर में ही मेहमान है बेटी जन्म से पहले बाद जन्म के……क्यों होती कुर्बान है बेटी क़सम तुझे है भारत माँ की……इज्ज़त दो सम्मान है बेटी

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