Sunday, April 29, 2018

चार ग़ज़लें समहुत से (1.दीपावली है छा गयी; 2.कहने को तो कितने कहते; 3.दिलवाले ही नफरत की; 4.जलते हैं जो शम्मा के संग) Comments

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चार ग़ज़लें
- डॉ. वेद मित्र शुक्ल
अंग्रेजी विभाग, राजधानी कॉलेज
दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली-110015
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Ved Mitra Shukla
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