तुम्हारी नयनो की नील सागर मे
जि करता हैं, सदा डूबता रहूं
तेरा मेरा प्रित मिलन का
गीत बनकर गुजती रहो सदा ।
वन उपवन का मधु से बढकर
तुम्हारी चुम्बन मीठा
तुम्हे चुनने को मिले तो
कौन भागता अमृत के पिछे ।
नितम्ब चुमते घना जुल्फों
बन गई काली घटा की बिम्ब
बेहकती हुई पवन से मिलकर
उदघोष कि अविरल बर्षा की ।
रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Meethe ehsason ka guldasta. Bohot khoob.