सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (15- 20) Poem by Tulsi Shrestha

सो फूलों का गुच्छा मेरी प्रियतम के लिए (15- 20)

तुम्हारी नयनो की नील सागर मे
जि करता हैं, सदा डूबता रहूं
तेरा मेरा प्रित मिलन का
गीत बनकर गुजती रहो सदा ।

वन उपवन का मधु से बढकर
तुम्हारी चुम्बन मीठा
तुम्हे चुनने को मिले तो
कौन भागता अमृत के पिछे ।

नितम्ब चुमते घना जुल्फों
बन गई काली घटा की बिम्ब
बेहकती हुई पवन से मिलकर
उदघोष कि अविरल बर्षा की ।

रचनाकारः- तुल्सी श्रेष्ठ
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Monday, August 31, 2020
Topic(s) of this poem: beauty,love,song
COMMENTS OF THE POEM
Aarzoo Mehek 31 August 2020

Meethe ehsason ka guldasta. Bohot khoob.

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