Saturday, April 2, 2016

माँ का आँचल 2 Maa Ka Aachal Comments

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किसको परवाह यहाँ मैं कैसे जी रही हूँ
ज़हर कितना मैं खामोशी से पी रही हूँ

आज कोई भी नहीं जो सर पे हाथ रखे और कहे तुम परेशान न हो
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Ahatisham Alam
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