श्रेय और सुकून Poem by A K Sarker Shaon

श्रेय और सुकून

झूठा कभी सर पर,
मत रखना ताज;
योग्य का करो आदर,
यही सच्चा काज।

धरती पर शांत रहो,
तजो झूठी शान;
देगा वही सबको,
न्याय का वरदान।

ए के सरकार शाओन
कवि और साहित्यकार
शाओनाज़ विला, ढाका।
२० मई २०२६

श्रेय और सुकून
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स्वयं अच्छे काम करते रहो। विधाता पुरस्कार देंगे। दूसरों का श्रेय खुद लेने पर वह न्याय करेंगे।
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