अन्धेरा कितना भी हो फिर भी जगमगाना है
जिंदगी बोझ बनके उम्र भर जब रह जाये , आदमी इस तरह उलझे कि मौत तडपाये
भ्रष्टाचार जब सरकार कि गलियो मे फिरे, देश के नेता ही जब भ्रष्टाचारी हो जाये
हमसफर आधे रास्ते मे हाथ छोड दे जब , अपनें भी जब पराये जैसा हो जाये
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