Ankahi Smrityan Poem by Yuvika Maurya

Ankahi Smrityan

Rating: 5.0

उन खाली कशमकस पन्नो को देखो,
कहीं वह तुम्हारे अनकहे सवालों के जवाब तो नहीं।
अकसर बैठे-बैठे यूं ही ख्याल आते हैं;
उन बीते लम्हों से जुड़े सवालों पर
ऐसे लम्हें जिन पर शायद ही मेरा उस वक्त
ध्यान गया हो।
क्यूँ यूँ ही हायात खुद को दोहराती है?
जब तब कुछ ध्यान न था,
तो अब क्यों स्मृतियाँ दिलाती है।
~युविका

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