Yuvika Maurya Poems

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1.
Ankahi Smrityan

उन खाली कशमकस पन्नो को देखो,
कहीं वह तुम्हारे अनकहे सवालों के जवाब तो नहीं।
अकसर बैठे-बैठे यूं ही ख्याल आते हैं;
उन बीते लम्हों से जुड़े सवालों पर
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