दुनियादारी
डा० नवीन कुमार उपाध्याय
संपादक कृष्ण माधव
कविता संग्रह
.दुधिया बदन,
कृष्ण बसन,
अरुणिम अधर,
न कभी मुखर,
मादक मुस्कान,
नयन कमान,
चितवन परम तीक्ष्ण,
करे किसी को भी दीन -हीन;
देख ले एक झलक,
मिटे न देखने की ललक,
काममय मन आहत,
पुनि -पुनि दर्शन चाहत।
देने - लेने का नाम है, दुकानदारी
दिखावे- औपचारिकता का नाम, दुनियादारी।
.दुनिया एक तमाशा है,
लोगों ने मुझे बुलाया है।
मैं नाचने-गाने को तैयार,
भले कभी अब तक न नाचा गाया हूँ।
मैंने सुना था अपने कानों से,
एक बार जरुर तुम आ जाना,
गाना अच्छा तुम गाते हो,
लिखकर गीत सुना जाना;
नये नये गीत लिखे हमने,
आज सबको सुनाने आया हूँ।
मैंने देखा था बेकली-बेबसी,
सबकी ही प्यारी नजरों में,
जब जा लौट रहा था पिछली बार,
देखा था सबको कहरों में; 💐
दूर जाकर भी न हुआ बर्दाश्त,
फिर सभी से मिलने आया हूँ।
जब आया था, तब खुशियाँ थीं,
लोगों ने देख, था किया वाह-वाह,
भले ही मेरे मुँह से उस समय,
निकल गया था आह-आह;
सँग पाकर मिला आनंद,
तब आज सामने आया हूँ।
जब बाद में बातें याद आईं,
तो मेरा भी मन गया मचल,
हम भी खुश हुए बहुत,
अरमान मेरे गये उछल;
इसी उछल कूद में खुश होकर,
'नवीन'आज नाचने आया हूँ।
.दुनिया की नजर में भले न हम दीखें,
लेकिन हम तेरे लिए ही जीते हैं,
इसीलिए हर रोज सबेरे सबेरे Good Morning कहते हैं ।
.
दुनिया को निभाते, खुद को सताते आये हैं,
खुदी को खोकर बस तुमको पाने आए हैं,
मेरी बात पर न होता इकरार तुमको कभी,
मगर सच सदा ही सत्य रहते आये हैं।
मुहब्बत करनेवाले कभी जुदाई सह नहीं सकते, सदा साथ रहते हैं।
दुनिया देख न पाती भले उनको, लेकिन हर पल प्यार सौगात देते हैं।।
.दुनिया ने मुझे बुलाया है,
किया मेरा हार्दिक अभिनंदन;
भले जब मैं था हुआ पैदा,
किया गँभीर करुण-क्रन्दन।
लोगों ने था चूमा मुझे तब,
किया अँक चिपटा भरपूर प्यार;
कोमल करतल कमल में लेकर,
किया था हृदय मिला अँकवार।
नयन मेरे बने इसके साक्षी,
सुन-देख तृप्त हुए थे श्रोत्र;
दिया लोगों ने मेरा परिचय,
तब बता दिया परिवार -गोत्र।
मधुर-मधुर वँशी बजी तब,
मधुमय शुरु हुए कोकिल बयनी गान;
उत्सव का मँगल मधुमय,
हमने भी सुना दिया करुण -तान।
धीमे-धीमे पग मेरे बढ़े,
बीत गये मेरे बहुत काल;
बहुत दिवस बीत गये यहाँ,
लोगों ने की छाया करतल बिटप विशाल।
चाहता अपना स्वरूप परिचय,
हो रहा नहीं मुझे इसका ज्ञान;
कोई आकर मुझे बता दे,
क्या मेरा सहज स्वरूप कैंकर्य भान।
मैं भी श्रद्धा सहित नमन कर लूँ,
दे परिचय, हे देव! मैं तेरा दास;
निज सेवा-सौभाग्य मुझे दान कीजिए,
हम करें नित्य सेवा-सुख रास।
दुनिया ने हमेशा रुलाया मुझे,
क्या तुम भी रुलाने वाले ही हो;
हमने तो समझा था यही,
तुम मेरे साथ रोने वाले हो! .
.दुनिया में आये तो प्यार सभी से कर लो,
जिंदगी दो-चार पल की, एतबार करना सीख लो,
कभी भी किसी से तकरार मत कर लो।
.दुनिया में आये तो, केवल मुसकुराना,
गम की राह दीखे कभी, सदा कतराना,
हँसी-खुशी पाने का ढूँढते रहना बहाना,
जिन्दगी दो दिन, कुछ जरुर कर जाना,
कुछ नहीं केवल, बस याद करे ये जमाना,
और दुनिया को कभी भी नहीं आजमाना।
.दुनिया में तुम जैसा कोई हसीं नहीं,
मेरे जैसा कोई खुशनसीब नहीं;
मेरा तुमसे हो गया प्यार,
हम तेेरे हैं, कह दो बस एक बार।
दुनिया में दीखते जो पादप,
कभी नहीं ये रहते चातक,
निष्काम प्रेम की परिभाषा,
यह तो केवल देव हित भाषा।
.
दुनिया में बहुत रिश्ते हैं,
माँ जैसा न कोई होता
; न इतना कोई प्यार करता,
गुजर जाने के बाद भी ख्याल करता।
.दुनिया में यारी से बढ़कर कुछ नहीं,
चिंता से ज्यादा कोई बीमारी नहीं,
मुहब्बत से हट कोई खुमारी नहीं,
मिलन से जुदा कोई खुशी प्यारी नहीं।
दुनिया में रहते सभी
बोलचाल की भाषा भले जुदा,
लेकिन हँसी औ रोने की अदा न कभी अलग-थलग।
दुनिया में लोग गलत करते हैं,
लेकिन उनसे सभी सीख लेते हैं,
दुबारा कोई कभी न कर दे गलत,
इसीलिए इससे इतिहास बनते हैं।
.दुनिया में सबसे आसान है,
किसी की प्रशंसा करना,
किसी के आगे सिर झुकाना,
किसी के सामने दीन होना;
सारा गरुर मिट जाता,
मन हल्का हो जाता है,
करुणापूरित नजर मिल जाता है।
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