आरज़ू ए आलम -Dua जहाँ सिर्फ तेरे चाहने वाले हाज़िर होंगे Poem by Ahatisham Alam

आरज़ू ए आलम -Dua जहाँ सिर्फ तेरे चाहने वाले हाज़िर होंगे

जहाँ सिर्फ तेरे चाहने वाले हाज़िर होंगे
वो महफ़िल भी ख़ास होगी
तेरे कब्ज़े में जाम होगा
लोगों के दिलों में प्यास होगी

ये इल्तेजा है कि आप अपने आशिकों में मेरा भी नाम लिख लें
चाहे रक़ीब कर लें चाहे ग़ुलाम लिख लें
आप इस क़दर क़रीब हों मेरे दिल से
कि कोई और ना पास आये
आरज़ू ए आलम है बस यही
वो दर आपका हो जहां मेरी आख़री सांस आये

Tuesday, November 1, 2016
Topic(s) of this poem: love
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2002 collection
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