आया हूँ बनकर तेरे दर पर सवाली Dua Poem by Ahatisham Alam

आया हूँ बनकर तेरे दर पर सवाली Dua

है हाथ भी ख़ाली दामन भी ख़ाली
आया हूँ बनकर तेरे दर पर सवाली

मुझे दीवाना अपना बना लीजिये
क़िस्मत मेरी जगा दीजिये
महशर में कौसर अता कीजिये
ऐ साक़ी मेरी इल्तेजा लीजिये
गर्मी ए महशर में साया रहे
सर पर रहे तेरी कमली काली
आया हूँ बनकर तेरे दर पर सवाली
है हाथ भी ख़ाली दामन भी ख़ाली

Tuesday, November 1, 2016
Topic(s) of this poem: love
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Originally written on 20 august 2002 at 4 pm
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