Tuesday, December 30, 2025

'विश्वगुरु: हँसते-हँते सच ' कवि गया प्रसाद आनन्द 'आनन्द गोंडवी' की कविता Comments

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देश बनेगा फिर से विश्वगुरु,
पोस्टर छप गया—काम पूरा हुआ,
इतिहास जहाँ पर रुका था साहब,
वहीं से भाषण फिर शुरू हुआ।
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Gaya Prasad Anand 'Anand Gondavi'
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