दिल्लगी दिल से हुई है, मेरी खता कुछ भी नहीं,
फिर सजा मुझको मिली क्यों? तू बता, क्या, ये है सही,
खेल आंखो का वो खेला, इसमें, मैं कहाँ और तू कहाँ,
प्यार करते दोनो जले, प्यार का ये कैसा जहाँ,
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