जिंदगी है बहता पानी
समय सरिता में बहती जाती,
रोड़ों की ठोकर सहती जाती,
इसकी है बस यही कहानी।
जिंदगी है बहता पानी।
धाराएं राह में जुडती जातीं,
अंधे मोड़ों पर मुड़ती जातीं,
चलती जाय सतत सयानी। जिंदगी...
पल पल करती है ये कल-कल,
मचाती रहती दिल में हलचल,
है ये बेढब, कभी सुहानी। जिंदगी...
कभी पर्वतों से लड़ जाती,
कभी शिला से ही थम जाती,
हो जाती है कभी तूफानी। जिंदगी...
कभी अपनी गति पर इतराती,
कभी तो स्थिर सी हो जाती,
करती कभी खेल बचकानी। जिंदगी...
कौन से स्रोत से है निकलती,
किस सागर में जाकर मिलती,
दुनिया है अब तक अंजानी। जिंदगी..
(C) एस. डी. तिवारी
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Kbhi takraakar muflisi k chattanon se Kuch bikharti Kuch aage badti Jeeva ka nirmal behta paani..... Lovely poem full of just life.....thank you for sharing :)