राम के परम भक्त हनुमान Poem by Manjeshwari P MYSORE

राम के परम भक्त हनुमान

प्रेम और भक्ति के महासागर हनुमान, जिनके प्रभु श्री राम
दया की गंगा कलकल बहे रगरग में, ऐसे धनी श्री राम
ज्ञानी गुणी हैं श्री राम के परम भक्त हनुमान, जय श्री राम
तन मन स्वस्त, सुखी जो सुमिरे जय हनुमान, जय श्री राम

राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम

महाबली हनुमान के सुंदर मन मंदिर में बसे हैं श्री राम
सच्चे कर्म धर्म के प्रतीक हैं राम नाम, राम सियाराम
और कुछ न सुझे तो पुकारो श्री हरि श्री कृष्ण श्री राम
बोलो राम, जय जय राम, जय हनुमान, जय सिया राम

राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम

राम हैं करुणा के महासागर, प्रेम और सच्चाई के पर्वत हैं राम
लाखों मानव सितारे, सब में एक ही चाँद सूरज राम
राम के प्रेम कृपा बूंद को तरसे हम, मधुर सागर हैं राम
राम की महिमा अपरंपार, गौरीशंकर सिद्ध श्री राम

राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम

सुनि, अनसुनि अपार ज्ञान ब्रह्माण्ड की मधुर ध्वनि है राम
सांसों की गति है राम, दिल की धड़कन है राम, सिया राम
जीवन मृत्यु, आदि अंत्य सब माया है, श्री राम अनंत है राम
सब सिद्धि, निधि, सुख के अमृत बिंदु है राम, सिया राम

राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम
राम सियाराम जय जय राम

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
My humble prayers 🙏😇❤️ to Lord Rama.. Jai Sri Ram!
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