कुछ सीखा रही है जिंदगी तो क्यों नहीं सीख जाता हूं। Poem by Nihal Mishra

कुछ सीखा रही है जिंदगी तो क्यों नहीं सीख जाता हूं।

बस मन में यही दोहराता जाता हूं,
कुछ सीखा रही है जिंदगी तो क्यों नही सीख जाता हूं।
क्यों किसी और की गलतियों को मैं सुधारना चाहता हूं,
अपने मै को क्यों, मैं ही मार देना चाहता हूं।
रास्ते अलग है फिर भी क्यों साथ चलना चाहता हूं,
हैं और भी संभावनाएं क्यों नही उन्हें तलाशता हूं ।
कुछ सीखा रही है जिंदगी तो क्यों नही सीख जाता हूं।।
अपनों में गिना था जिनको मैंने वो सब अपने -अपने हो गए,
अब कहा किसी को है फुरसत जिनके सपने सच हो गए।
इस, उम्मीद से अनुभव तक के सफर में मै यूंही चला जाता हूं,
है भीड़ बहुत रास्तों में, पर अपना किसी को कह नही पता हूं।
कुछ सीखा रही है जिंदगी तो क्यों नही सीख जाता हूं।।

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Accidental Love
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