सच्चे मनों का मिलन Poem by Pushp Sirohi

सच्चे मनों का मिलन

मुझे मत रोको उस पवित्र मिलन से
जहाँ दो मन सच के साथ बँधते हैं—
वहाँ प्रेम कोई सौदा नहीं होता,
वहाँ दिल ईमानदारी से धड़कते हैं।

सच्चा प्रेम वह नहीं
जो परिस्थितियों के साथ रंग बदल ले,
जो सामने वाले के मूड पर जीए,
जो थोड़ी सी ठोकर में बिखर जाए।

वह प्रेम तो छाया है—
जो शाम होते ही लंबी हो जाती है,
वह प्रेम तो धुआँ है—
जो हवा बदलते ही गुम हो जाता है।

पर सच्चा प्रेम
छाया नहीं— सूरज है,
धुआँ नहीं— अग्नि है,
और किसी की पसंद नहीं—
आत्मा की स्थायी धुन है।

वह बदलता नहीं
किसी गलतफहमी से,
किसी दूरी से,
किसी तीसरे के शब्दों से,
किसी समय की चालाकी से।

अगर कोई कहे—
"अब वो पहले जैसा नहीं रहा, "
तो समझो—
प्रेम नहीं बदला,
बस चेहरे पर थकान उतर आई।

अगर कोई कहे—
"अब वो मेरे लिए नहीं लड़ता, "
तो समझो—
प्रेम नहीं मरा,
बस जिंदगी का बोझ बढ़ गया।

सच्चा प्रेम
लड़ाई नहीं ढूँढता,
पर सच के लिए झुकता भी नहीं—
वह न खुद को खोता है,
न किसी को गिराता है।

वह तूफ़ानों में
किसी किले की तरह खड़ा रहता है—
बाहर बिजली गिरती है,
पर भीतर दीपक जलता रहता है।

वह समुद्र में
एक प्रकाश-स्तम्भ है—
जिसे लहरें मारती रहती हैं,
पर दिशा नहीं बदलती।

प्रेम शरीर नहीं—
विश्वास है,
प्रेम भाषा नहीं—
निभाने की हिम्मत है,
प्रेम मुलाकात नहीं—
यादों में भी निभने वाली मौजूदगी है।

समय सब कुछ तोड़ता है—
चेहरे, आवाज़ें, आदतें, सपने,
पर प्रेम अगर सच्चा हो
तो समय की कैंची भी
उसकी डोर नहीं काट पाती।

सौंदर्य फीका पड़ सकता है,
हाथ काँप सकते हैं,
आँखें थक सकती हैं,
पर जो प्रेम "सच" पर टिका हो—
वह उम्र से बड़ा होता है।

और सुनो—
अगर प्रेम बस आकर्षण है,
तो वह एक दिन थक जाएगा,
अगर प्रेम बस चाहत है,
तो वह किसी मोड़ पर रुक जाएगा।

पर अगर प्रेम
दो आत्माओं का अनुबंध है—
तो दुनिया चाहे जितनी बदल जाए,
वह प्रेम अपनी जगह स्थिर रहेगा
एक वचन की तरह…
एक प्रार्थना की तरह…
एक अमर हकीकत की तरह।

अगर ये बात झूठ निकले—
तो मान लेना
मैंने प्रेम को समझा ही नहीं,
और अगर ये सच हो—
तो मान लेना
प्रेम ही दुनिया का सबसे बड़ा सच है।

---Pushp Sirohi

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