आज में भविष्य Poem by Pushp Sirohi

आज में भविष्य

मत पूछो
कि रास्ता कब साफ़ होगा,
पहले कदम रखो—
रास्ता खुद बन जाएगा।

मत कहो
कि साधन कम हैं,
कम साधन ही तो
साहस की कसौटी हैं।

तुम्हारे पास
जो आज है—
उसी में
एक पूरा भविष्य छिपा है।

जिन्हें तुम "छोटा" समझते हो,
वही छोटे कदम
पहाड़ चढ़ाते हैं।

हर शुरुआत
उत्सव नहीं होती,
कुछ शुरुआतें
खामोशी में जन्म लेती हैं।

अपने भीतर
एक दीप जलाओ—
फिर देखना
अंधेरा पीछे हटेगा।

आज का "थोड़ा"
कल का "बहुत" बनता है,
बस
रुकना मत।

जब तुम चलते हो,
तब भाग्य भी
तुम्हारी तरफ़
चल पड़ता है।

और हाँ—
शुरू करने के लिए
परफेक्ट दिन नहीं चाहिए,
बस
एक ज़िद चाहिए।

— पुष्प सिरोही

आज में भविष्य
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