वो वादे जो साथ मरने के थे
वो वादे ही सबसे पहले मरे
मैंने हर लफ़्ज़ पर यक़ीन किया
उसने हर सच से इनकार किया
जो कहा था, वो निभा न सका
जो निभाया, वो समझा न सका
मक़्ता:
हिसाब रखना भी गुनाह बन गया
जब इश्क़ में था पुष्प
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