मत पूछो
कि दुख कब जाएगा—
दुख
कभी-कभी
जीवन भर साथ रहता है।
पर मैं कहता हूँ—
दुख का अंत
भूलना नहीं,
कर्म है।
जिसे हमने खोया,
उसकी याद
शब्दों में नहीं रहती,
वह हमारे
किए गए काम में
जीती है।
मैं रो सकता हूँ,
पर रुक नहीं सकता।
क्योंकि
रुक जाना
मृत्यु को
जीत देना है।
मैंने जाना—
प्रार्थना
कभी-कभी
हाथ जोड़ना नहीं,
हाथ बढ़ाना है।
जब दिल टूटे,
तो उसे
झूठे सुकून से नहीं,
सच्चे श्रम से
जोड़ना चाहिए।
जो चला गया,
वह लौटेगा नहीं—
पर उसके नाम पर
मैं
खुद को बेहतर बना सकता हूँ।
मैं उसकी याद को
कमज़ोरी नहीं बनाऊँगा,
मैं उसे
दिशा बनाऊँगा।
क्योंकि
जीवन का धर्म
सिर्फ़ महसूस करना नहीं,
किया जाना है।
और जब मेरा अंत आए,
तो लोग कहें—
"उसने दुख को
बोझ नहीं बनाया,
उसे
कर्म में बदल दिया।"
— पुष्प सिरोही 🕯️
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