१. धूल, प्रदूषण, गंदगी और अतिक्रमण
शूद्र का धूल उड़ाना हवा को दूषित कर जाता है,
शूद्र का प्रदूषण फैलाना जीवन पर संकट लाता है।
शूद्र का गंदगी फैलाना चारों तरफ बदबू लाता है,
शूद्र का सरकारी जमीनों का अधिग्रहण रोष बढ़ाता है।
२. चालाकी, जालसाज़ी और पहरेदारी का शोर
शूद्र की चालाकी हर दांव पर चाल चलती है,
शूद्र की जालसाज़ी से फाइलें उलझती हैं।
शूद्र की पहरेदारी से गलियों में खौफ पलता है,
शूद्र का मचाया शोर हर मकान को खलता है।
३. हॉर्न, बाधा, चोरी और अध्ययन में खलल
शूद्र का हॉर्न बजाना कानों के पर्दे फाड़ता है,
शूद्र की चोरियों से हर घर का चैन उजड़ता है।
शूद्र की हरकतें सबके रास्ते में बाधा बनती हैं,
शूद्र के शोर से पढ़ने वालों की शांति मिटती है।
४. राजनीति, पंचायत, दुर्व्यवहार और अपकृत्य
शूद्र की राजनीति से पंचायतें बिगड़ जाती हैं,
शूद्र का गलत नीतियों का प्रयोग मुश्किलें बढ़ाता है।
शूद्र द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है,
शूद्र दूसरों को भी दुराचार के लिए उकसाता है।
शूद्र के इन सारे अपकृत्यों से समाज त्रस्त होता है,
शूद्र के हर गलत कर्म से न्याय रोता है।
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