सपनों को थामे रखना Poem by Pushp Sirohi

सपनों को थामे रखना

सपनों को थामे रखना—
क्योंकि जिस दिन
सपने छूट गए,
उस दिन जीवन
टूटे परों वाला
एक पंछी हो जाता है
जो उड़ना भूल गया।

सपनों को थामे रखना—
क्योंकि सपने मर जाएँ तो
दिन सूने पड़ जाते हैं,
रातें लंबी हो जाती हैं,
और भीतर का आकाश
बिना तारों के रह जाता है।

सपनों के बिना
राह सिर्फ़ धूल है,
और धूल में
क़दमों की पहचान
मिट जाती है।

सपनों के बिना
मन का खेत
बंजर हो जाता है—
जहाँ उम्मीद
बीज होकर भी
अंकुर नहीं बनती।

इसलिए—
जब भी समय
तुम्हारी आँखों से
रोशनी छीनने लगे,
तब अपने सपनों को
दीये की तरह
हथेली पर रख लेना।

क्योंकि सपने
मंज़िल नहीं—
सपने वो अग्नि हैं
जो आदमी को
चलाती रहती है।

सपनों को थामे रखना…
और यदि दुनिया कहे
"छोड़ दे"—
तो मुस्कुरा देना,
क्योंकि
जो सपने छोड़ देता है
वो जीता नहीं,
बस चलता है।

— पुष्प सिरोही

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