१. जब टूटा धैर्य और जागा रोष
सड़कों के शोर और हॉर्न की उस तीखी चीख के बीच,
फेरीवालों की पुकार और आवारा पशुओं की भीच।
सदियों तक जो चुपचाप सहे, अपमान का हर एक जहर,
आज वही मेहनतकश बन बैठे हैं, प्रलयंकर रूद्र प्रहर!
खेतों की मिट्टी से उठकर, जब हुंकार भरी इस जग ने,
तख्त-पटल सब हिल डाले, अन्याय की हर एक हद ने।
२. जब शूद्र ने सबको बना दिया 'रूद्र'
अन्याय की हर एक जंजीर को जब क्रोध की आग ने छुआ,
शूद्र का वह मौन समंदर, महाविनाशक रूद्र हुआ।
राजनीति के सिंहासन और प्रशासन की फाइलों पर,
भ्रष्टाचार के खात्मे को, लिख दी नई इबारतों पर।
अब सिर्फ अकेले नहीं, हर शोषित जन जाग उठा है,
देख-देख इस क्रांति को, हर दबे का दिल भाग उठा है—
बनकर प्रचंड 'रूद्र' अब इसने, सबको राह दिखाई है,
अन्याय के उस साम्राज्य पर, महाक्रांति जो छाई है!
३. तकनीक, वाहन और आधुनिक संसार
खेतों की कच्ची राहों से, जब 'हीरो बाइक' की रफ्तार उठी,
हाथों में एंड्रॉइड मोबाइल ले, नई डिजिटल बहार उठी।
IBM, Google और Kyndryl तक, कोडिंग की जब धार चली,
देखकर इस हुनर को दुनिया, अचंभे में पड़ ही गई।
पंचायतों की चौपालों पर, न्याय की जब मशाल जली,
सामंती सोच की हर दीवार, पल भर में नीचे ढही।
४. नारी सशक्तिकरण और अंतिम हुंकार
चूल्हे-चौके की बेड़ी तोड़, जब नारियां मैदान आईं,
प्रशासन और संसद में उन्होंने, अपनी धाक जमाई।
शूद्र और समाज का जब यह, ऐसा समन्वय होता है,
तब अन्याय का हर पहरेदार, खौफ से सहम कर सोता है।
शोर मचेगा, हक मिलेगा, गूंजेगा यह चारों और—
शूद्र के इस 'रूद्र' रूप से, जग में मचा प्रलय का शोर!
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