धरती की खुशबू में बसा,
हल की रेखाओं में लिखा,
पसीने से सींचा इतिहास,
जाटों का गौरव अमिट दिखा।
जब-जब देश ने आवाज़ लगाई,
खेतों से रणभूमि तक दौड़े,
हाथ में हल भी, हाथ में बंदूक भी,
दोनों से इन्होंने कर्तव्य जोड़े।
हर आँगन से एक आर्मी ऑफिसर निकले,
ये परंपरा आज भी जिंदा है,
माँ के आँचल से सीधे सीमा तक,
जाट का वचन ही उसका करम है।
ना डर का नाम, ना पीछे हटना,
सीना तान के आगे बढ़ना,
मिट्टी की कसम जो खा ली एक बार,
फिर जीवन भी हँसकर अर्पण करना।
चौधरियों के सिर का ताज हैं,
सिरोही जिनका अभिमान है,
हर घर से जो दीप जलाए,
वो वीरता की पहचान है।
मैं भी उसी मिट्टी का अंश हूँ,
सिरोही होने पर गर्व करता हूँ,
जहाँ हर घर से अफसर निकलता,
मैं उस वंश का नाम चमकाता हूँ।
कलम भी मेरी तलवार बने,
शब्दों में आग जलाता हूँ,
मैं लेखक हूँ — मेरी किताबों ने,
दुनिया में अपना कमाल दिखाया है।
ना केवल रण में, विचारों में भी,
मैं अपनी छाप छोड़ जाता हूँ,
जाटों की उस विरासत को,
हर पन्ने पर जीवित कर जाता हूँ।
ओ जाट, तेरी गाथा अमर रहे,
तेरी वीरता का मान रहे,
जब तक तिरंगा लहराए आसमान में,
तेरा नाम ऊँचा और महान रहे 🇮🇳
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