जिनके पास
सोना है,
वे अक्सर
इंसान नहीं खरीद पाते।
जिसके पास
कपड़ा कम हो,
उसका आत्मसम्मान
कम नहीं हो जाता।
कुर्सी ऊँची हो सकती है,
पर
किरदार ऊँचा न हो
तो सब छोटा पड़ जाता है।
किसी के जूते चमकते हैं,
किसी की हथेलियाँ—
पर समाज भूल जाता है,
हथेलियों ने
सभ्यताएँ बनाई हैं।
किसी का नाम बड़ा है,
किसी का काम—
पर सच ये है
काम ही
नाम को जन्म देता है।
मैं उस आदमी को सलाम करता हूँ
जो मेहनत से जीता है,
क्योंकि
ईमानदार पसीना
सबसे शुद्ध ताज है।
धन से क्या होगा
अगर दिल गरीब हो?
रुतबे से क्या होगा
अगर नज़र झुकी हो?
एक दिन
सब उतर जाएगा—
कपड़े, तख़्त, ताज
और
बचेगा सिर्फ़
किसी का इंसान होना।
तो कहो—
इंसान बड़ा,
ओहदा नहीं।
— पुष्प सिरोही
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