१. खेतों से ट्रैक्टर की रफ्तार और किसान का बल
मिट्टी की छाती को चीरकर, जो अन्न उपजाते हैं,
ट्रैक्टर के स्टीयरिंग पर अपने, भाग्य नए लिखते हैं।
वही किसान और मेहनतकश, देश की असली शान बने,
अन्नादाता बनकर वे ही, इस भारत की जान बने।
खेतों की उस मिट्टी से जब, ट्रैक्टर की गूँज उठती है,
अन्याय की हर दीवार वहाँ, पल भर में टूटती है!
२. फौज और पुलिस में पक्का पहरा
सीमाओं के उन पहरों पर, सीना ताने खड़े हैं जो,
वर्दी पहन पुलिस की हर दम, अनुशासन में ढले हैं जो।
फौज की उस गोली में अब, इनका ही तो बलिदान है,
देश की रक्षा के खातिर, हँसकर देते प्राण हैं।
सुरक्षा की हर धुरी पर अब, इनका ही अधिकार चला,
देख-देख इस शौर्य को, दुश्मन का दिल दहल उठा!
३. राजनीति, प्रशासन और सत्ता की कमान
संसद के गलियारों से लेकर, प्रशासन की फाइलों तक,
जिलाधिकारी की कुर्सी से, मन्त्री के दरबार तलक।
राजनीति की इस बिसात पर, चालें अब वे चलते हैं,
फाइलों पर अपनी कलम से, नए हुक्म वे लिखते हैं।
जो कभी थे हाशिए पर, वे अब सरकार चलाते हैं,
प्रशासन की मशीनरी को, अपने हाथ नचाते हैं!
४. चौतरफा शोर और देश की रीढ़
सड़कों से लेकर गलियों तक, हॉर्न और फेरीवालों का शोर,
पंचायतों की चौपालों पर, गूँज उठा है चारों ओर।
एंड्रॉइड मोबाइल, हीरो बाइक, तकनीक का यह नया संसार,
IBM, Google की दुनिया में, गूँज रही इनकी हुंकार।
शूद्र और मेहनत के बल पर, खड़ा हुआ यह पूरा देश,
यही लोग हैं देश की रीढ़, यही बदलते हैं परिवेश!
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem