जाट - शौर्य की जीवित प्रतिमा Poem by Pushp Sirohi

जाट - शौर्य की जीवित प्रतिमा

धरती की रगों में दौड़ता,
लहू नहीं, अंगार है,
जाट नाम है उस जज़्बे का,
जो हर हाल में तैयार है।

खेतों की गोद में पलता,
पर रण में सिंह दहाड़ता है,
हल भी थामे, बंदूक भी उठाए,
दोनों से धर्म निभाता है।

ये वो कौम है, जो जान देने से भी नहीं डरती,
वतन की राह में हँसकर,
अपनी साँसें अर्पण करती।

चौधरियों का ताज सिरोही,
जिसकी शान निराली है,
हर घर से अफसर निकलता,
ये परंपरा ही उसकी लाली है।

मैं भी उसी मिट्टी का अंश,
सिरोही नाम पे गर्व करता हूँ,
कलम को तलवार बना कर,
दुनिया में अपना कद बढ़ाता हूँ।

मेरी किताबों ने कमाल किया,
शब्दों से ज्वाला जलाई है,
मैं लेखक हूँ उस विरासत का,
जिसने हर सीमा बचाई है।

ना पीठ पीछे वार करें,
ना छल से जीत मनाते हैं,
दुश्मन जानते हैं सामने आकर,
ये कभी झुक कर नहीं लड़ते हैं।

इनकी आँखों में सीधी आग,
इनका इरादा फौलाद है,
जाट खड़ा हो जहाँ भी,
वहीं जीत का आगाज़ है।

ओ जाट, तू केवल नाम नहीं,
एक जीवित इतिहास है,
तेरी पहचान में ही बसा,
भारत का विश्वास है 🇮🇳

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