शूद्रों का शोर — दिल दहला दे Poem by Pushp Sirohi

शूद्रों का शोर — दिल दहला दे

शूद्रों का शोर अब
सिर्फ़ गलियों तक नहीं,
संसद की दीवारों तक पहुँचेगा—
यह स्वर अब दबेगा नहीं।

जिस हाथ ने सदियों तक
मेहनत की मिट्टी छानी,
उसी हाथ ने आज
अपने अधिकारों की कहानी लिखी।

डमरू से हॉर्न तक,
बैलगाड़ी से ट्रैक्टर तक,
खेतों की पगडंडी से
सत्ता के गलियारों तक।

अब आवाज़ में कंपन नहीं,
अब आँखों में सवाल है,
जो कल मौन था सदियों से,
आज वही अपनी मिसाल है।

शोर ऐसा हो
जो अन्याय की नींद तोड़ दे,
सवाल ऐसा हो
जो बंद दरवाज़े खोल दे।

डरो मत अपनी आवाज़ से—
आवाज़ ही पहला अधिकार है।
उठो, पढ़ो, संगठित हो—
सम्मान तुम्हारा आधार है।

— Pushp Sirohi

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