बेवफ़ा का हुनर Poem by Pushp Sirohi

बेवफ़ा का हुनर

उसने बेवफ़ाई इस हुनर से की
कि खुद को मासूम साबित किया

मैं सवाल बनकर रह गया
उसने हर जवाब बदल दिया

मेरे हिस्से में इल्ज़ाम आए
उसके हिस्से में ताली आई

मक़्ता:
कहानी किसी और की बन गई
जिसका नाम था पुष्प

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