मन समर्पित करता हूँ अब
तन समर्पित कर दूँगा मैं,
बलि चढ़ाने के अवसर पर
सबसे आगे आऊँगा मैं।
है कसम इस पावन माटी की
पैर न पीछे खींचूँगा,
वक्त पड़े उस रण के क्षण में
रक्त से धरती सींचूँगा।
अंदाज हमारे ऐसे होंगे
कि दुश्मन-दुनिया थर्राएगी,
लहू के एक-एक कतरे पर
शान हमारी मुस्काएगी।
वन्दे मातरम् गीत हमारा
शान से गाकर जीएंगे,
है हमारी अटल प्रतिज्ञा
मरकर भी हम गाएंगे।
है सौगंध इस शोणित की
वतन हमारा पहले होगा,
फौलादी सी है ये तमन्ना
शहादत ही मेरा गर्व होगा।
जन-गण की ही भक्ति होगी
मुख पर जय का नारा होगा,
कर्तव्यनिष्ठ ये प्राण हमारे
देश ही हमारा गौरव होगा।
ना हमारा मजहब होगा
ना ही अपनी जात होगी,
रंग-रूप से नाता कैसा
बस देश की ही बात होगी।
केसरिया, श्वेत और हरियाली
इन रंगों से नाता होगा,
केसरिया का मान बचाने
प्राणों का बलिदान होगा।
अवाम की रक्षा धर्म हमारा
देश ही अपना शौर्य होगा,
जिगरा है अपनी खूनों में
सिपाही ये बेखौफ होगा।
इस धरती पर खरोंच न आए
दुश्मन की तलवारों से,
है कसम इस वर्दी की
वतन बचेगा वारों से।
देशभक्ति की अलख जगी है
इस मुल्क के स्वाभिमान में,
माटी का जब तिलक लगेगा
तब तिरंगा होगा सम्मान में।
© रजनीश राजन ✍️
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