रुनझुन करती ये तेरी पायल,
खनक पायल बताए रे,
तोहरी मस्तानी चाल है।
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आसमान में बढ़ें, हम जमीन पे चलें
हम नहीं झुकने वाले इस वतन के लिए
सर उठा के चलें, सर उठा के बढ़ें
हम फिदा हैं सनम इस वतन के लिए।
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बरसती धूप जैसे आग का गोला,
न सह सकने वाली पैरों में छाला।
भट्ठी में झुलसा अलकतरा का हाल,
मेरी टूटी चप्पल की बेतरतीब चाल।
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बरसती धूप, आग का गोला,
पैरों में असहनीय छाला।
भट्ठी सा तपता ये अलकतरा,
मेरी टूटी चप्पल का बेदम सहारा।
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मन समर्पित करता हूँ अब
तन समर्पित कर दूँगा मैं,
बलि चढ़ाने के अवसर पर
सबसे आगे आऊँगा मैं।
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आओ आशा के दीप जलाएँ,
मिलकर अंधियारा दूर भगाएँ।
ज्ञान की रोशनी को हम,
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तुम्हें नग़्मों में मैं चाँद कहूँ या कहूँ फागुन की होली।
तू हँसती है तो है मेरी हस्ती, मैं चंदन तू रोली।
कभी-कभी तो लगती मुझको, तेरी मिश्री घोली बोली।
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पैरों में घुंघरू पहन के मुझसे मिलने आना
मेरी गलियों से होके आना, राह भटक ना जाना
राह में तेरी चाहत को मैं फूलों से सजाऊं
तू मेरी है और मैं तेरा, ये बात कभी ना भूलना
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My straying heart wanders for you,
In this dark and lonely night.
Drowned in your fragrance, lost in your soul,
Tell me, how do I love you right?
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दहेज लेना... एक कानूनी अपराध,
कहा गया देना... सबसे बड़ा पाप।
माना कि दहेज............लेना-देना
......है एक सामाजिक अभिशाप।
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