Rajnish Rajan Poems

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रुनझुन करती ये तेरी पायल,
खनक पायल बताए रे,
तोहरी मस्तानी चाल है।
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2.

'मंज़िल की संधान-क्षुधा में,
राही निज पथ भूल गया;
पाने की अंधी चाहत में,
वो जीवन का रस भूल गया।'
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3.
मां

मां—मां होती है,
एक साक्षात जन्नत होती है।
कठिन से कठिन भाषा का,
वो सरल 'Decoder' होती है।
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4.

खूब है वो, खुश है वो
मुझसे बिछड़कर,
दूर है वो।
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5.
एक आहट भरी रात

एक शांत, सुनसान रात,
रात का दूसरा पहर,
लगभग दो बजे।
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6.
रंग प्रीत के

'लगे रंग जब प्रीत का, तन हुए तस्कीन-ए-रूह
रंग संग जब प्रीत मिले, लगे खिले खेत में फूल

रीत गीत संगीत सही, मीत हुआ मनमीत
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7.
मैं और राई का पहाड़

बालू के ढेर पर बैठकर,
मैं महलों का ख्वाब बुनता हूँ।
राई को मुट्ठी में लिए,
ख्वाबों का एक महल बुनता हूँ।
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8.
झुलसती धरा की पुकार

नभ के कठिन प्रांगण खड़ा, मार्तण्ड का अभिमान है;
ज्वाला बिखरती रश्मियाँ, झुलसा रहा भू-भाग है।
आतप विकल वसुधा हुई, झुलसा रहा जग-प्राण है;
पश्चिम क्षितिज के छोर पर, यह तेज भी ढल जाएगा।
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9.
' मैं '

मैं
ब्रह्मांड की सबसे बड़ी पहेली है,
जिसे हम गहराई से कभी टटोलते नहीं हैं।
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10.
समाज: किस ओर?

एक अनुशासन का पहरा था,
जो बंधन सा लगता था;
वह बंधन नहीं,
समाज को पतन से बचाए रखता था।
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