Rajnish Rajan Poems

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रुनझुन करती ये तेरी पायल,
खनक पायल बताए रे,
तोहरी मस्तानी चाल है।
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2.

'मंज़िल की संधान-क्षुधा में,
राही निज पथ भूल गया;
पाने की अंधी चाहत में,
वो जीवन का रस भूल गया।'
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3.
मां

मां—मां होती है,
एक साक्षात जन्नत होती है।
कठिन से कठिन भाषा का,
वो सरल 'Decoder' होती है।
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4.

खूब है वो, खुश है वो
मुझसे बिछड़कर,
दूर है वो।
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5.
अपनी धुन में जीता हूँ।

मैं दीवाना, मस्तमौला, अपनी धुन में जीता हूँ,
प्रेम-रस है अपना ही यह, मैं तो इसको पीता हूँ।

जी रहा हूँ अपनों में मैं, मस्त-मगन ही रहता हूँ,
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6.
किसान और उसकी कुदाल

हवाओं की बदलती दिशाएं,
और इन हवाओं की कुछ अजीब चाल।
आँखों में नम सपनों के साथ,
कभी तेज, कभी धीरे,
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7.
मिलना बिछड़ना

सूरज को जब ढलते देखा, लाली उसकी फीकी थी,
घाट पे नदियों को देखा, बहती धारा भी रोई थी।

हम बैठे थे वो बैठी थी, शोर हवाएँ करती थीं,
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8.
बड़ी होती सृष्टि

वो गाँव की नन्ही सी,
खेलती सृष्टि अब बड़ी हो गई है,
अनजाने में वो सब से हँसती-बोलती,
सबको हँसाती है।
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9.
झुलसती धरा की पुकार

नभ के कठिन प्रांगण खड़ा, मार्तण्ड का अभिमान है;
ज्वाला बिखरती रश्मियाँ, झुलसा रहा भू-भाग है।
आतप विकल वसुधा हुई, झुलसा रहा जग-प्राण है;
पश्चिम क्षितिज के छोर पर, यह तेज भी ढल जाएगा।
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10.
' मैं '

मैं
ब्रह्मांड की सबसे बड़ी पहेली है,
जिसे हम गहराई से कभी टटोलते नहीं हैं।
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