मद-मुद्रा में मैं आऊँ उससे पहले, तुमको साँसों में भर लूँ;
साँसों में भरकर तुम्हें, आलिंगन करूँ—मदिरालय में जाऊँ।
मदमाता मैं तेरी चाहत से, मदिरालय में मदहोशी ना छाए;
तू साकी, तेरा अधर ही प्याला, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
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रुनझुन करती ये तेरी पायल,
खनक पायल बताए रे,
तोहरी मस्तानी चाल है।
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आसमान में बढ़ें, हम जमीन पे चलें
हम नहीं झुकने वाले इस वतन के लिए
सर उठा के चलें, सर उठा के बढ़ें
हम फिदा हैं सनम इस वतन के लिए।
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बरसती धूप जैसे आग का गोला,
न सह सकने वाली पैरों में छाला।
भट्ठी में झुलसा अलकतरा का हाल,
मेरी टूटी चप्पल की बेतरतीब चाल।
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बरसती धूप, आग का गोला,
पैरों में असहनीय छाला।
भट्ठी सा तपता ये अलकतरा,
मेरी टूटी चप्पल का बेदम सहारा।
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मन समर्पित करता हूँ अब
तन समर्पित कर दूँगा मैं,
बलि चढ़ाने के अवसर पर
सबसे आगे आऊँगा मैं।
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आओ आशा के दीप जलाएँ,
मिलकर अंधियारा दूर भगाएँ।
ज्ञान की रोशनी को हम,
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तुम्हें नग़्मों में मैं चाँद कहूँ या कहूँ फागुन की होली।
तू हँसती है तो है मेरी हस्ती, मैं चंदन तू रोली।
कभी-कभी तो लगती मुझको, तेरी मिश्री घोली बोली।
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पैरों में घुंघरू पहन के मुझसे मिलने आना
मेरी गलियों से होके आना, राह भटक ना जाना
राह में तेरी चाहत को मैं फूलों से सजाऊं
तू मेरी है और मैं तेरा, ये बात कभी ना भूलना
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My straying heart wanders for you,
In this dark and lonely night.
Drowned in your fragrance, lost in your soul,
Tell me, how do I love you right?
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दहेज लेना... एक कानूनी अपराध,
कहा गया देना... सबसे बड़ा पाप।
माना कि दहेज............लेना-देना
......है एक सामाजिक अभिशाप।
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निकला हूँ गाँव छोड़कर,
घरवालों को यह बोलकर,
जा रहा हूँ मैं शहर,
आऊँगा कुछ रुपये जोड़कर।
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नज़्मों के दरख्तों के साये में,
रफ्ता रफ्ता मैं चला।
बात हुई मदमस्त वहां,
जहां इक हसीना से इकरार हुआ।
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यादें ताज़ा, दिल भी रूठा;
आँखें बंजर, हर शाम अधूरा।
बिन आँसू के, बहती धारा;
मैंने दिल को हज़ारों बार सिला।
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ये सफ़र जो आज तन्हा है, रहनुमा तेरी यादों में;
बेसबर हम अकेले हैं, कोई अख़बार नहीं तेरी।
तेरी यादें भी तन्हा हैं, मुकद्दर अश्क बहाता है;
मंजिलें चैन ढूंढती हैं, सफ़र भी खूब हंसता है।
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यादों की तरंगों में, खिलता एक गुलाब सा चेहरा,
रुमानी इश्क़ की छनक, से रोशन मन का सवेरा।
हँसती थी तो हस्ती थी—वो एक चाँद का टुकड़ा,
वो बादल की थी बेईमानी... जिसने चाँद को घेरा।
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सीखी है हमने तेरी केवल आँखों से यारी,
न सीखी हमने कोई कैसी भी होशियारी।
चलता-फिरता तेरा आशिक़ हूँ मैं,
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बेचैन आहट, करवट बदलती यादें,
सूनसान रात और उसकी जुदाई।
तड़पती धड़कन, बहकती मेरी सांसें,
प्यासा प्रेमी और मैं....... इश्क में पागल।
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Rajnish Rajan is a promising Indian poet and writer hailing from Birnoudh, Goradih, Bhagalpur, Bihar. His literary journey is deeply rooted in the rural essence and social realities of his homeland. He received his early education at Middle School, Birnoudh, Goradih. Later, he moved to the city for higher studies and graduated from the Mathematics Department of the prestigious Marwari College, Bhagalpur. His academic background in Mathematics brings a unique depth and structural precision to his poetic expressions. His writing is known for its emotional intensity and connection with the common man. Some of his works include: Karahti Raat, Mard Hun Na, Pyar Ki Abhilasha, Mere Mastur, Jine Do Jo Jaise Jite Hai, and Naj e Jawani.)
तू मेरी मधुशाला
मद-मुद्रा में मैं आऊँ उससे पहले, तुमको साँसों में भर लूँ;
साँसों में भरकर तुम्हें, आलिंगन करूँ—मदिरालय में जाऊँ।
मदमाता मैं तेरी चाहत से, मदिरालय में मदहोशी ना छाए;
तू साकी, तेरा अधर ही प्याला, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
मदमस्त नहीं मधुशाला में, मदमाता जब तेरे अधरों से पीता;
मैं मदिरालय में बस जाने वाला—तू साकी, तू ही मधुशाला।
मख़मूर सरशारी साग़र ना ढूँढता, सुराही-गर्दन से मय पाता;
तेरे अधरों से पीता मैं मदमाता, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
तुम मैकश, तू ही मधुपाया, इस दिल की प्यास बुझाने वाली;
तुम पलकों से मद-नयन को, हयापरस्त तुम करने वाली।
तेरी नयन-मधुशाला में मदमाता, मय अधर से न छूने वाला;
मैकदे से पीता मैं मदमाता, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
मादकता से मैं गर मदमाता, मदहोशी में सारा मधुशाला पीता;
मद-मंथन कर चाहत-परस्त, मैं लब-ए-जाम पीने वाला।
तेरी आँखें प्याली, तू मधुशाला, मैं मदमाता—तू मेरी नूर-ए-हाला;
अधर-सुधा मैं पीने वाला, हाँ, मैं तेरे चित्त-भ्रम में जीने वाला;
तेरी साँस सुराही, तू ही मधुशाला, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
मधुमय प्याले से छलकता, मैं मृग-छौने सी चाल से मदमाता;
लावण्य-मद मैं पीने वाला, तो क्या मदिरालय, क्या मधुशाला?
मद-विभोर मैं अंतर्मन से, मद-सिक्त आलिंगन-पाश तुम्हारा;
तेरी दृष्टि जाम, हृदय मधुशाला, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
रोम-हर्षण से मद-मूर्छित होता, तुममें चित्त-विश्राम मैं पाता;
तेरे नयन-कोर से मैं पीने वाला, मदमाता प्राण-सुधा मैं पीता।
मेरी अंग-राग तू मद-मंजरी, तुममें ही मद-मरीचिका मैं पाता;
मधुशाला में गर मदमाता, मदहोशी में सारा मधुशाला पीता;
हाँ, दृष्टि-कौमुदी में जीने वाला, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
सजदा-ए-साकी तेरी मदहोशी में, अदृश्य जाम मैं पीता हूँ;
तू ही मधुशाला, मदिरालय में जाकर मदिरा-अधर ना छूता हूँ।
मैं कर-लकीर से पीने वाला, तो क्या मदिरालय, क्या मधुशाला?
तेरी देह-लतिका मदगंधा है; तू मदिरालय, तू ही मेरी मधुशाला।
तू मद-कलश है, तू मदमयी, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
अक्स गुलाबी, आँखें शराबी, मैं स्वयं को तुझमें घोलने वाला;
तेरी पायल रिमझिम मख़मूरी, मैं उस मय में मय होने वाला;
जब आहट मय, तेरी चाहत मय, मैं रोम-रोम से झूमने वाला;
तेरा बदन सुराही, तू मधुशाला, बस मदिरालय में जाने वाला ॥
© रजनीश राजन ✍️
© रजनीश राजन ✍️
ग़ज़ब का इश्क है ' मोहब्बत', ये दिल की कज-अदाई है.......।
I left my wish to turn into dust. wish to live only if you are there.
वो राहों में आँखें खोलकर चलती है, उसकी बांह मेरी बांह से टकराती है ।
'मेरी खुद की लिखी कहानी में, मेरे ही किरदार का अंत होता है।'
जब जिंदगी में सभी विकल्प खत्म हो जाए तो एक सच्चा, सरल और समर्पित हो जाओ, सफलता मिलना तय है