रुनझुन करती ये तेरी पायल,
खनक पायल बताए रे,
तोहरी मस्तानी चाल है।
...
'मंज़िल की संधान-क्षुधा में,
राही निज पथ भूल गया;
पाने की अंधी चाहत में,
वो जीवन का रस भूल गया।'
...
मां—मां होती है,
एक साक्षात जन्नत होती है।
कठिन से कठिन भाषा का,
वो सरल 'Decoder' होती है।
...
'लगे रंग जब प्रीत का, तन हुए तस्कीन-ए-रूह
रंग संग जब प्रीत मिले, लगे खिले खेत में फूल
रीत गीत संगीत सही, मीत हुआ मनमीत
...
बालू के ढेर पर बैठकर,
मैं महलों का ख्वाब बुनता हूँ।
राई को मुट्ठी में लिए,
ख्वाबों का एक महल बुनता हूँ।
...
नभ के कठिन प्रांगण खड़ा, मार्तण्ड का अभिमान है;
ज्वाला बिखरती रश्मियाँ, झुलसा रहा भू-भाग है।
आतप विकल वसुधा हुई, झुलसा रहा जग-प्राण है;
पश्चिम क्षितिज के छोर पर, यह तेज भी ढल जाएगा।
...
एक अनुशासन का पहरा था,
जो बंधन सा लगता था;
वह बंधन नहीं,
समाज को पतन से बचाए रखता था।
...
शांत हवा में शोर है बिखरा,
मन का वो अभिमान पिघलकर,
बन बह रहा वो नीर नदी का;
बैठ किनारे मीन को देखा,
...
मौन तड़प को कौन देखे?
मैं जो तड़पूँ पी के प्याला।
यह हाला नहीं,
है विष का प्याला।
...
तन मन मेरा सुलग रहा है,
अब टोक ना मुझको ऐ साकी!
मधुरस है पीने दे मुझको,
अब रोक न मुझको ऐ साकी!
...
मैं दीवाना, मस्तमौला, अपनी धुन में जीता हूँ,
प्रेम-रस है अपना ही यह, मैं तो इसको पीता हूँ।
जी रहा हूँ अपनों में मैं, मस्त-मगन ही रहता हूँ,
...
हवाओं की बदलती दिशाएं,
और इन हवाओं की कुछ अजीब चाल।
आँखों में नम सपनों के साथ,
कभी तेज, कभी धीरे,
...
सूरज को जब ढलते देखा, लाली उसकी फीकी थी,
घाट पे नदियों को देखा, बहती धारा भी रोई थी।
हम बैठे थे वो बैठी थी, शोर हवाएँ करती थीं,
...
वो गाँव की नन्ही सी,
खेलती सृष्टि अब बड़ी हो गई है,
अनजाने में वो सब से हँसती-बोलती,
सबको हँसाती है।
...
आसमान में बढ़ें, हम जमीन पे चलें
हम नहीं झुकने वाले इस वतन के लिए
सर उठा के चलें, सर उठा के बढ़ें
हम फिदा हैं सनम इस वतन के लिए।
...
बरसती धूप जैसे आग का गोला,
न सह सकने वाली पैरों में छाला।
भट्ठी में झुलसा अलकतरा का हाल,
मेरी टूटी चप्पल की बेतरतीब चाल।
...
बरसती धूप, आग का गोला,
पैरों में असहनीय छाला।
भट्ठी सा तपता ये अलकतरा,
मेरी टूटी चप्पल का बेदम सहारा।
...
Rajnish Rajan is a promising Indian poet and writer hailing from Birnoudh, Goradih, Bhagalpur, Bihar. His literary journey is deeply rooted in the rural essence and social realities of his homeland. He received his early education at Middle School, Birnoudh, Goradih. Later, he moved to the city for higher studies and graduated from the Mathematics Department of the prestigious Marwari College, Bhagalpur. His academic background in Mathematics brings a unique depth and structural precision to his poetic expressions. His writing is known for its emotional intensity and connection with the common man. Some of his works include: Karahti Raat, Mard Hun Na, Pyar Ki Abhilasha, Mere Mastur, Jine Do Jo Jaise Jite Hai, and Naj e Jawani.)
।। तेरे पैरों का शृंगार ।।
रुनझुन करती ये तेरी पायल,
खनक पायल बताए रे,
तोहरी मस्तानी चाल है।
छन-छन करती तेरी पायल,
मस्त गगन चमकायो रे,
तोहरी मोहिनी मूरतिया।
गुलाबी एड़ियाँ तेरे पैरों की,
मस्त किरण चटकायो रे,
तेरी नैना नशीली।
रंग-बिरंगी नेल पॉलिश,
धरा शृंगार बढ़ायो रे,
तेरी धनुषी आभा,
मन मेरो मचलायो रे,
तेरी इंद्रधनुषी छाया।
तेरे पैरों की रंगत,
मन को भावे,
मन मेरा मचलायो रे,
तेरी बहकी नजरिया।
चांदी की बिछिया,
तेरे अंगुलिन सोहे,
मस्त चाँद भी आज मुरझाए रे,
तेरे गालों की लाली।
चरण कमल तेरो,
खिलता गुलाब है,
बहकी सी तेरी मिजाज रे,
तेरी मस्तानी चाल है।
तेरे पैरों की थिरकन,
और घुंघरू का शोर है,
छम-छम करती ये तेरी पायल,
तेरी हिरनी सी चाल है।
गहरी मेहंदी, बारीक रचनी,
मस्त सगुन अब छायो रे,
तेरी सुराही गर्दन।
तेरे पैरों की आलता,
गहरी सुर्ख लाल है,
करती मुझको मदहोश रे,
तेरे कानों की बाली।
तेरे पैरों की आहट,
मन में बसे है,
मन में सजनी की आहट आयो रे,
तेरी मस्तानी चाल है।
हिरनी सी फुर्ती,
और मस्त तेरी चाल है,
रुनझुन करती ये तेरी पायल,
तेरी मस्तानी चाल है।
© रजनीश राजन ✍️
'मेरी खुद की लिखी कहानी में, मेरे ही किरदार का अंत होता है।'
जब जिंदगी में सभी विकल्प खत्म हो जाए तो एक सच्चा, सरल और समर्पित हो जाओ, सफलता मिलना तय है
'जीवन के पहले दिन से आखिरी सांस तक, जो बच्चे के हर एहसास को बिना कहे समझ ले, उसे ही 'माँ' कहते हैं।
'मेरी फ़ितरत इतनी भी ओछी नहीं कि, लाश का वज़न तौल कर जनाज़े को कंधा दूँ।'
'कमजोरी में तो रूह भी जिस्म का साथ छोड़ जाती है, तुम अपनों से वफा की उम्मीद, मजबूत रहने तक ही रखना।'
'मैं शून्य हूँ, मेरा कोई वजूद नहीं... सब तुम्हारे फैसले का खेल है, पीछे रख कर मुझे मिटा दो, या आगे रख कर अपनी कीमत बढ़ा लो।'