'अमीर रास्ता, सहमी चप्पल' Poem by Rajnish Rajan

'अमीर रास्ता, सहमी चप्पल'

बरसती धूप जैसे आग का गोला,
न सह सकने वाली पैरों में छाला।
भट्ठी में झुलसा अलकतरा का हाल,
मेरी टूटी चप्पल की बेतरतीब चाल।

तपते सूरज का जलन और जिद,
अमीर रास्ते पे चलती टूटी चप्पल।
मैं और मेरी टूटी चप्पल का हाल,
मेरी टूटी चप्पल की बेताल चाल।

वफादारी और तेरा मेरा वो वर्षों का सफर,
हिम्मत, मेरा हमसफर और ये तपती सड़क।
घिसकर एड़ी में वो तपती तपन की चुभन,
तेरी घिसती सिसकियों से मेरा बोझिल मन।

मेरी टूटी चप्पल और उसपे लगी गांठ,
लोहे की तार से बंधी चप्पल की डोर।
अपराधी की तरह सहमा हुआ चप्पल,
अमीर रास्ते पे चलता करता फट-फट।

बरसती धूप में दिखता दूर पानी की चमक,
चाह में उनके बढ़ाता पैर मंजिल की तरफ।
उसमें भी छलावा करती यह जलती डगर,
तपती धूप में जलता टूटी चप्पल का सफर।

चप्पल पर पड़े अंगूठे और एड़ी का निशान,
मुझपे मेरा मानसिक बोझ और मेरा थकान।
सहती वो टूटी चप्पल जैसे वो कितना महान,
ए टूटी हुई मेरी किस्मत के मेरे चप्पल महान।

© रजनीश राजन ✍️

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