'मैं उनकी हस्ताक्षर का हिस्सा हूँ' Poem by Rajnish Rajan

'मैं उनकी हस्ताक्षर का हिस्सा हूँ'

यादों की भंवर का वो हिस्सा,
मैं हूँ उनके जीवन का किस्सा,
जिसने बोया, हकीकत में मैं —
उनकी हस्ताक्षर का हिस्सा हूँ।

उनकी अंगुलिया, मजबूत सा कंधा,
सहारा और राह दिखाने का जरिया।
मेरे खुशी की वजह, उनका पसीना,
मेहनत निस्वार्थ उनकी, हकीकत में—
मैं उनकी हस्ताक्षर का हिस्सा हूँ।

पीले पड़ रहे पन्नों पर मिटती स्याही,
हिसाबों के गणित की पूरी ज़िम्मेदारी,
मिट्टी से लिपटे यूं उनके पैर और हाथ,
घर का स्तंभ थे उनकी वो ज़िम्मेदारी।

उनके चेहरे पर झुर्रियों की सिलवटें,
अधूरी उनकी ख्वाहिश की डायरी,
उसे पूरी करने की हर कोशिश चाह,
उनकी सुकून और मुस्कराने की वजह।

पिताजी के धैर्य और मेरा लड़कपन,
उनकी कहानी से, और मेरी जवानी,
बहकते मेरे ख्वाब और थामते हाथ,
उनके ख्वाहिश की थी एक कहानी—
'हम और हमारा परिवार हो आबाद'।

वृद्ध एक बरगद का पेड़, हकीकत में—
मैं उनकी हस्ताक्षर का हिस्सा हूँ।

बुढ़ापे में लाठी का सहारा और,
बच्चों के द्वारा दिया गया समय,
उन्हें हरपल वो ऊर्जावान बनाता है।
घर में हंसते हुए बूढ़े मां-बाप—
प्रत्यक्ष भगवान का दर्शन कराता है।

उनके हाथों की कांपती हुई अंगुलिया,
डगमगाते उनके हाथों का हस्ताक्षर,
हकलाती सी उनकी पूरी कहानियां,
बुझती मशाल की चमक और रोशनी—
भरी जवानी में मेरी उतनी औकात नहीं।

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