प्रिये तुम्हारा एक अस्तित्व लिखूं । Poem by Rajnish Rajan

प्रिये तुम्हारा एक अस्तित्व लिखूं ।

आओ ना तुम.............,
मैं तुमपे कुछ श्रृंगार लिखूँ।
श्रृंगार में तुझको शाम लिखूँ,
संग में मैं तुझे सम्मान लिखूँ।
तेरे माथे की बिंदी खूब चमके,
तेरे माथे पर स्वाभिमान लिखूँ।
तेरे गाल की कोमल आहट पर,
मैं तेरी चाहत में मुस्कान लिखूँ।
मैं तेरी आँखों में सुरमा जड़ूँ,
संग में सच का एक जहाँ लिखूँ।
तेरे कानों की झुमकी यूँ चमके,
मैं पूरी दुनिया का संज्ञान कहूँ।
तेरे होठों की मस्त चुलबुलाहट पे,
मैं बंद परिंदों को आज़ाद लिखूँ।
तेरे गले की सुंदर नक़्श प्रिये,
मैं उसमें एक आवाज़ लिखूँ।
तेरी बदन है यूँ एक अद्भुत काया,
उसमें तुमको एक अस्तित्व लिखूँ।

© रजनीश राजन ✍️

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