वक्त अभी कुछ और है। Poem by Rajnish Rajan

वक्त अभी कुछ और है।

ऐ हवा, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।
अडिग अभी चट्टान है,
काम कर, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।

ऐ हवा, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।
साथ है सृष्टि अभी,
कर्म से कर्मठ है;
काम कर, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।

वो खड़ा है,
तलवार है,
दोधारी तलवार है।
देश ही उसका प्यार है,
चाल ही पहचान है;
ऐ हवा, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।

ये गीत है,
सरगम है,
जीत इसपे सवार है।
जज्बा इसका विराट है,
धुन ही पहचान है।
सुन,
काम कर, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।

ये मन है, उड़ान है,
शान ही उसकी शोहरत है।
गर्म है मिजाज उसका,
कर्म ही पहचान है।
एक काम कर,
तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।

ये शाम है, संगीन है,
मन अभी गंभीर है।
तन अभी चट्टान है,
कर्म ही पहचान है।
एक काम कर,
तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।

ये आग है, ज्वाला है,
मन अभी भी साध्य है।
जान अब भी खूब है,
रंग ही पहचान है।
ऐ हवा, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।

ये नाम है,
विश्वास है,
देश का सरताज है।
खून है, वरदान है,
कसम इसका चट्टान है।
एक काम कर, तू रुख बदल,
वक्त अभी कुछ और है।
© रजनीश राजन ✍️

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