हम बचपन में खेले साथ-साथ,
हर सुबह-शाम हम पास-पास;
धड़कन धड़की भी हर बात-बात,
तो क्यों, क्या हुआ जो—
मैं डाल-डाल, तू पात-पात?
हर बाधा-विघ्नों में साथ-साथ,
थे घर में जब हम पास-पास;
माँ की डाँट पड़ी जब साथ-साथ,
तो क्यों, क्या हुआ जो—
मैं डाल-डाल, तू पात-पात?
पढ़े-लिखे हम साथ-साथ,
हमने बात की हर बात-बात;
ना छुपाया हमने कोई बात साथ,
तो क्यों, क्या हुआ जो—
मैं डाल-डाल, तू पात-पात?
रोटी खाई हमने एक थाल साथ,
माँ का प्यार मिला जब हर बात साथ;
शिक्षा मिली जब एक स्कूल साथ,
तो क्यों, क्या हुआ जो—
मैं डाल-डाल, तू पात-पात?
राह चले हम साथ-साथ,
मिलकर हँसे हम बात-बात;
बापू की अंगुली पकड़ी जब साथ-साथ,
तो क्यों, क्या हुआ जो—
मैं डाल-डाल, तू पात-पात?
सपने देखे इक रात साथ,
संजोया इसको हर बात साथ;
साँस ली जब आस-पास,
तो क्यों, क्या हुआ जो—
मैं डाल-डाल, तू पात-पात?
रिश्ते-नाते सब अब भूल गया?
अपनों से तू क्यों रूठ गया?
वो बात बता, क्या भूल हुई?
थे पास-पास, अब दूर हुए;
क्यों, क्या हुआ जो—
मैं डाल-डाल, तू पात-पात?
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