चंद वक़्त अभी तो गुज़रे हैं। Poem by Rajnish Rajan

चंद वक़्त अभी तो गुज़रे हैं।

कुछ पल अभी तो गुज़रे हैं,
खुद से तुम क्यों हार रहे?
खो नहीं अपने मंसूबों को,
जहां अभी भी सुंदर है।

चंद शाम अभी तो गुज़रे हैं,
क्यों आँखों में सन्नाटा है?
तू कर अभी शुरुआत यहां,
देख, नया सवेरा आया है।

चल उठ, अभी शुरुआत कर,
वक्त अभी भी साथ है।
तू वो अभी करतब दिखा,
जिस कौशल में सामर्थ्य है।

तू वो बली सुल्तान है,
जो सल्तनत का हकदार है।
चंद वक़्त अभी तो गुज़रे हैं,
नए वक्त की शुरुआत कर।

तू भूल नहीं, तू कौन है?
वक़्त की पहचान कर।
यह दिन की शुरुआत है,
सूरज का भी आविर्भाव है॥

© रजनीश राजन ✍️

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