।। तेरे पैरों का शृंगार ।। Poem by Rajnish Rajan

।। तेरे पैरों का शृंगार ।।

रुनझुन करती ये तेरी पायल,
खनक पायल बताए रे,
तोहरी मस्तानी चाल है।

छन-छन करती तेरी पायल,
मस्त गगन चमकायो रे,
तोहरी मोहिनी मूरतिया।

गुलाबी एड़ियाँ तेरे पैरों की,
मस्त किरण चटकायो रे,
तेरी नैना नशीली।

रंग-बिरंगी नेल पॉलिश,
धरा शृंगार बढ़ायो रे,
तेरी धनुषी आभा,
मन मेरो मचलायो रे,
तेरी इंद्रधनुषी छाया।

तेरे पैरों की रंगत,
मन को भावे,
मन मेरा मचलायो रे,
तेरी बहकी नजरिया।

चांदी की बिछिया,
तेरे अंगुलिन सोहे,
मस्त चाँद भी आज मुरझाए रे,
तेरे गालों की लाली।

चरण कमल तेरो,
खिलता गुलाब है,
बहकी सी तेरी मिजाज रे,
तेरी मस्तानी चाल है।

तेरे पैरों की थिरकन,
और घुंघरू का शोर है,
छम-छम करती ये तेरी पायल,
तेरी हिरनी सी चाल है।

गहरी मेहंदी, बारीक रचनी,
मस्त सगुन अब छायो रे,
तेरी सुराही गर्दन।

तेरे पैरों की आलता,
गहरी सुर्ख लाल है,
करती मुझको मदहोश रे,
तेरे कानों की बाली।

तेरे पैरों की आहट,
मन में बसे है,
मन में सजनी की आहट आयो रे,
तेरी मस्तानी चाल है।

हिरनी सी फुर्ती,
और मस्त तेरी चाल है,
रुनझुन करती ये तेरी पायल,
तेरी मस्तानी चाल है।

© रजनीश राजन ✍️

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