आसमान में बढ़ें, हम जमीन पे चलें
हम नहीं झुकने वाले इस वतन के लिए
सर उठा के चलें, सर उठा के बढ़ें
हम फिदा हैं सनम इस वतन के लिए।
मैं भारत माँ का बेटा हूँ,
धूल चंदन मेरा शृंगार बने।
इस मिट्टी से जनम लिया,
ये मिट्टी मेरी पहचान बने।
ए देश की मिट्टी, तेरी खुशबू,
जान से भी मुझे प्यारा लगे।
हँसते-हँसते जान मैं दे दूँ,
तू मुझको अपना बेटा कहे।
राह तकती मेरी बूढ़ी माँ,
सूनी आँखों में वो आस दिखे।
माँ के हाथ का एक निवाला,
मेरी शान में सौ-सौ चाँद जड़े।
नाज़ है तेरी मिट्टी पे,
तूने शेरों को जो जन्म दिए।
हँसते-हँसते वो सूली चढ़े,
तेरी अस्मत पे कुर्बान हुए।
हँसता हुआ वो घर आँगन,
वो आँगन मुझे बुलाता है।
मेरी रोती माँ के आँचल से,
आँसू भी सिसक के रोता है।
ओ माये मेरी तू मत रोना,
तेरा बेटा अभी तो जिंदा है।
मैं जीता रहूँ तेरी अस्मत पे,
मेरी शान ये सौ-सौ बार कहे।
देश की मिट्टी की खुशबू से,
सोंधी सोंधी महक लगे।
जब भी मरूँ मैं तेरे लिए,
तेरी आँचल मेरा कफ़न बने।
तू हँसती रहे, मुस्कान तेरी,
मेरी किस्मत को वो धन्य करे।
तेरे लिए सौ-सौ बार मरूँ,
तुम मुझको अपना बेटा कहे।
तुम मुझको अपना बेटा कहे...
ये मिट्टी मेरी पहचान बने...
© रजनीश राजन ✍️
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