बरसती धूप, आग का गोला,
पैरों में असहनीय छाला।
भट्ठी सा तपता ये अलकतरा,
मेरी टूटी चप्पल का बेदम सहारा।
अमीर सड़क पर सहमी चाल,
मैं और मेरी चप्पल, बेहाल।
बरसों की वफा, हिम्मत हमसफर,
लोहे के तार से बंधा ये सफर।
तेरी सिसकियों से बोझिल मन,
एड़ी में चुभती वो तीखी तपन।
अपराधी सी डरती, करती फट-फट,
मंजिल की चाह में जलती डगर।
चप्पल पर उभरे संघर्ष के निशान,
मेरी टूटी किस्मत की साथी महान।
© रजनीश राजन ✍️
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