बौखलाया दर्द Poem by Rajnish Rajan

बौखलाया दर्द

कशमकश भरी तेरी यादें,
तेरी आहट मेरी यादों में,
यादों का पुर-शोर समंदर,
समंदर में बिगड़ा तूफ़ान,
तूफ़ान की उगाही समय,
और चाँद का बदला रूप।

ला-हासिल अधूरी ख्वाहिश,
मेरी ख्वाहिश तेरी चाहत की,
और चाहत तेरी शिद्दत की,
रोती और फिसलती आवाज़ें,
आवाज़ों में बौखलाया दर्द,
दर्द में लिखी मेरी कहानी,
सब कुछ बयान करती है।

मेरी किस्मत में उदासी,
उदासी में मेरी जवानी,
जवानी में भड़कता अश्क,
अश्क में भरी तेरी चाहत,
और मैं समेटता हुआ अश्क।

तेरी बदलती मुझसे बोली,
बोली में महकता नीम,
अब नीम की मीठी गोली,
उस गोली के तीखे बोल,
सब कुछ बयान करती है।

© रजनीश राजन

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