Sunday, March 29, 2026

॥ श्री राधा-गिरिधर मुक्तक ॥ Comments

Rating: 0.0

ताप तपन, मन बन उपवन;
हे गिरी गिरिधर, सुन सुवन।
गण मगन, मन आत्म रमन;
गल प्रेम की, जब हुई छुवन॥
...
Read full text

Rajnish Rajan
COMMENTS
Close
Error Success