वो बेखौफ है उनसे; सामाजिक कुरीतियों का क्या?
मुझसे वो बेचैन होती है, मुझे महसूस करती है।
वो बेखौफ है उनसे, अदाएं खूब छाई हैं;
मगर बेचैन हैं आंखें, उनकी आंखें बताती हैं।
वो बेखौफ है उनसे, खुदा भी खूब राजी है;
गजब की चाह है हममें, बस उसकी रज़ा जरूरी है।
आह उनकी निकलती है, आहट मेरे दिल में होती है;
गजब का इश्क है यारों, ये दिल की कज-अदाई है!
कभी वो दूर जाती है, कभी वो पास आती है;
गजब का इश्क है यारों, ये दिल की कज-अदाई है!
बेचैनी आँखों में दिखती है, शरमा कर दूर जाती है;
गहरी सांस जो उनकी, मुझे भी बेचैन करती है।
तड़प, जो आज ठहरी है—इश्क में प्यार घोला है;
मेरे दिल ने उसे तो आज, अपना महबूब समझा है।
रिश्ता ये पुराना है, मगर एहसास ताज़ा है;
गिला है इश्क से मुझको, अभी इजहार बाकी है।
चंद शब्दों को जोड़ा है, अभी एहसास भरना है;
बस वेणी में फूल लगा आना, मुझे इजहार करना है।
मैं जब 'Love you' बोलूं तो, तुम 'Love you too' नहीं कहना;
धड़कन तेज़ कर लेना, मैं उनकी धुन समझ लूंगा।
धड़कन तेज़ कर उसने, संग पायल भी छनकाई है;
चेहरे पर तेज़ है उसके—जहाँ क्या खूब सजाई है!
वो अब प्यार से मुझको, अपना हमदम बुलाती है;
प्यार की राह में मैंने, उसे हमनवा बनाया है।
मंज़िल की फ़िक्र नहीं मुझको, गजब का इश्क पाया है;
मोहब्बत नाम है इसका, मोहब्बत रास आई है।
वो जो बेचैन थी आंखें, उनमें अब सुकून छाया है;
गजब का इश्क है यारों, ये दिल की कज-अदाई है!
© रजनीश राजन ✍️
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