रिश्तो की डोर
इक दुनिया थी जब रिश्ता था, अब तो रिश्ता का पता नही
किस ओर चली और कहा गई, अब तो दुनिया बस किस्सा है ।
तब गैर भी अपने होते थे, जब पीड़ा हमको होती थी
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