Safety संरक्षा 2 Poem by Ahatisham Alam

Safety संरक्षा 2

संरक्षा बने जब कार्यकुशलता का आधार
लक्ष्य नहीं दुर्लभ कोई उत्पादन का हर मानक हो जाए पार

ये ध्यान रहे कि भूल से भी दुर्घटना न कोई घटित होने पाये
ये प्रयत्न रहे की वातावरण भी तनिक ना प्रदूषित होने पाये

सुरक्षित परिवेश और सुरक्षित कार्यशैली को अपनाना है
संरक्षा के स्वप्न को हर स्तर पर सच कर दिखाना है ।

Monday, March 6, 2017
Topic(s) of this poem: lifestyle
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